
Workshop और engineering field में अक्सर Accuracy (Accuracy) और Precision (Precision) को एक ही समझ लिया जाता है। यही सबसे बड़ी गलती है। इन दोनों के बीच फर्क न समझने से न सिर्फ काम की quality खराब होती है, बल्कि machine failure, rework और समय की बर्बादी भी होती है।
Accuracy का मतलब होता है कि लिया गया माप (Measurement) असली या सही value के कितना करीब है। वहीं Precision का मतलब होता है कि बार-बार लिया गया माप आपस में कितना समान है। यानी measurement repeat करने पर result कितना consistent है।
मान लीजिए किसी shaft का actual size 20 mm होना चाहिए। अगर fitter बार-बार 19.98 mm नाप रहा है, तो यह precision तो है, लेकिन accuracy नहीं है। वहीं अगर एक बार 20.01 mm और दूसरी बार 19.99 mm आ रहा है, तो accuracy के करीब है लेकिन precision कम है। Ideal condition वह होती है जहाँ accuracy और precision दोनों सही हों।
अगर accuracy पर ध्यान न दिया जाए, तो part drawing के अनुसार नहीं बनेगा। इससे fitting tight या loose हो सकती है, जिससे vibration, noise और wear बढ़ जाता है। वहीं अगर precision पर ध्यान न दिया जाए, तो हर part अलग-अलग बनेगा, जिससे interchangeability खत्म हो जाती है।
Manufacturing में interchangeability बहुत जरूरी होती है। अगर हर part अलग dimension का है, तो assembly मुश्किल हो जाती है और mass production संभव नहीं रहती। यही कारण है कि industries precision पर इतना जोर देती हैं।
Accuracy और precision में फर्क न समझने का एक और नुकसान inspection में दिखाई देता है। अगर measurement instrument सही नहीं है या उसका zero error ठीक नहीं किया गया है, तो fitter को लगता है कि काम सही है, जबकि actual dimension गलत होती है।
एक skilled technician वही होता है जो यह समझे कि accuracy target है और precision process की quality को दर्शाता है। दोनों में संतुलन न होने पर engineering काम professional level तक नहीं पहुँच पाता।
निष्कर्ष
Accuracy और precision में फर्क न समझना छोटी गलती लगती है, लेकिन यही गलती बड़े engineering failures की वजह बनती है।