
आजकल अक्सर यह कहा जाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence – AI) और ऑटोमेशन आने के बाद ITI जैसे ट्रेड्स की जरूरत खत्म हो जाएगी। लेकिन यह सोच अधूरी जानकारी पर आधारित है। सच्चाई यह है कि AI आने के बाद ITI ट्रेड्स खत्म नहीं होंगे, बल्कि और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएंगे।
AI और मशीनें data पर काम करती हैं। वे instructions follow करती हैं, लेकिन real-world workshop में हर situation एक जैसी नहीं होती। Welding, fitting, maintenance और assembly जैसे कामों में material का behavior, environment और human judgment बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। इन चीज़ों को पूरी तरह automate करना आज भी संभव नहीं है।
उदाहरण के लिए, welding में AI robot arc चला सकता है, लेकिन electrode selection, joint condition, material quality और site situation को समझने के लिए skilled welder की जरूरत रहती है। अगर welding में defect आ जाए, तो AI उसे identify कर सकता है, लेकिन cause को समझकर process सुधारना आज भी इंसान का काम है।
Fitter trade में measurement, alignment और assembly जैसे काम precision मांगते हैं। हर machine अलग तरह से wear होती है। यह decide करना कि कहाँ adjustment चाहिए और कहाँ replacement, यह अनुभव और सोच से आता है—केवल algorithm से नहीं।
AI असल में skilled workers का replacement नहीं है, बल्कि एक tool है। जो ITI students AI को डर की तरह देखते हैं, वे पीछे रह जाते हैं। और जो AI को सीखकर, उसके साथ काम करना जानते हैं, वे future-ready technician बनते हैं।
भविष्य का welder, fitter या technician सिर्फ हाथ से काम करने वाला व्यक्ति नहीं होगा। वह machine parameters समझेगा, AI-based systems से data पढ़ेगा और सही decision लेगा। यानी skill + technology का combination।
इसलिए ITI ट्रेड्स का future खत्म नहीं हो रहा, बल्कि बदल रहा है। अब जरूरत है ऐसे technicians की जो skill के साथ scientific thinking और technology understanding भी रखते हों।
निष्कर्ष
AI jobs खत्म नहीं करता, बल्कि weak skills को खत्म करता है। मजबूत skill और सही सोच रखने वाले ITI professionals की मांग भविष्य में और बढ़ेगी।