
ऑटोमोबाइल इंजन का सबसे महत्वपूर्ण भाग फ्यूल सिस्टम होता है। इंजन की शक्ति, माइलेज और कार्यक्षमता पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती है कि फ्यूल सिस्टम सही मात्रा में और सही समय पर ईंधन की आपूर्ति कर रहा है या नहीं। MMV (मैकेनिक मोटर व्हीकल) और MD (मैकेनिक डीज़ल) ट्रेड के विद्यार्थियों के लिए फ्यूल सिस्टम का सही ज्ञान अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि अधिकतर इंजन की खराबियाँ इसी प्रणाली से संबंधित होती हैं।
फ्यूल सिस्टम का कार्य
फ्यूल सिस्टम का मुख्य कार्य इंजन को स्वच्छ ईंधन को उचित दबाव पर तथा सही समय पर पहुँचाना होता है। यदि ईंधन की आपूर्ति में रुकावट आती है, तो इंजन स्टार्ट नहीं होता या ठीक प्रकार से कार्य नहीं करता।
फ्यूल सिस्टम के मुख्य भाग
फ्यूल टैंक ईंधन को संग्रहित करता है।
फ्यूल पंप टैंक से ईंधन को इंजन तक भेजता है।
फ्यूल फ़िल्टर ईंधन में उपस्थित गंदगी को छानता है।
फ्यूल लाइन ईंधन के प्रवाह का मार्ग होती है।
कार्ब्यूरेटर या फ्यूल इंजेक्टर इंजन में ईंधन की मात्रा नियंत्रित करता है।
पेट्रोल इंजन का फ्यूल सिस्टम
पेट्रोल इंजन में फ्यूल सिस्टम अपेक्षाकृत सरल होता है। इसमें या तो कार्ब्यूरेटर या इलेक्ट्रॉनिक फ्यूल इंजेक्शन प्रणाली का उपयोग किया जाता है। यह प्रणाली हवा और पेट्रोल को उचित अनुपात में मिलाकर सिलेंडर में भेजती है।
डीज़ल इंजन का फ्यूल सिस्टम
डीज़ल इंजन का फ्यूल सिस्टम अधिक जटिल होता है। इसमें फ्यूल इंजेक्शन पंप, इंजेक्टर और हाई प्रेशर लाइन का उपयोग किया जाता है। डीज़ल इंजन में ईंधन बहुत अधिक दबाव पर सीधे दहन कक्ष में छिड़का जाता है।
फ्यूल सिस्टम की सामान्य खराबियाँ
फ्यूल फ़िल्टर का जाम हो जाना।
फ्यूल पंप का ठीक से कार्य न करना।
फ्यूल लाइन में लीकेज होना।
इंजेक्टर का चोक हो जाना।
कार्ब्यूरेटर या इंजेक्टर में गलत सेटिंग।
खराब फ्यूल सिस्टम के लक्षण
इंजन स्टार्ट होने में समस्या।
इंजन की शक्ति कम होना।
वाहन का माइलेज घट जाना।
इंजन का झटके के साथ चलना।
अत्यधिक धुआँ निकलना।
MMV / MD ट्रेड के विद्यार्थियों के लिए सुझाव
फ्यूल सिस्टम पर कार्य करते समय हमेशा साफ-सफाई का ध्यान रखें।
ईंधन से संबंधित कार्य करते समय अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन करें।
फ्यूल फ़िल्टर और इंजेक्टर की नियमित जाँच करें।
सही उपकरणों का प्रयोग करें और दबाव मापने के नियम समझें।
निष्कर्ष
MMV और MD ट्रेड में फ्यूल सिस्टम का ज्ञान एक कुशल मैकेनिक बनने की पहली सीढ़ी है। यदि विद्यार्थी इस प्रणाली को गहराई से समझ लेते हैं, तो वे इंजन की अधिकतर समस्याओं का समाधान आसानी से कर सकते हैं। यह ज्ञान न केवल परीक्षा में सहायक होता है, बल्कि कार्यशाला और उद्योग में भी एक सफल करियर बनाने में मदद करता है।